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योगी ने पकड़ा अखिलेश सरकार में हुआ 2000 करोड़ का घोटाला

ये घोटाला करीब 2000 करोड़ का बताया जा रहा है। अखिलेश सरकार के वक्त कागज पर 108 नंबर वाली 1480 एंबुलेंस चलाई जाती थी और 102 नंबर की 1960 एंबुलेंस चली।

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ये घोटाला करीब 2000 करोड़ का बताया जा रहा है। अखिलेश सरकार के वक्त कागज पर 108 नंबर वाली 1480 एंबुलेंस चलाई जाती थी और 102 नंबर की 1960 एंबुलेंस चली।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार के खिलाफ ऐसे सबूत मिले हैं जिससे अखिलेश की बदनामी भी होगी और मुश्किल भी बढ़ेगी ।  मायावती राज में नेशनल रुरल हेल्थ मिशन घोटाले ने खूम हंगामा मचाया था। अब अखिलेश की सरकार के वक्त एनआरएचएम घोटाला पार्ट 2 का राज़ खुला है। अखिलेश सरकार के वक्त चलनेवाली 102 और 108 नंबर एंबुलेंस के बारे में कुछ चौकानेवाली बातें जांच रिपोर्ट में पता चली है। एंबुलेंस दौड़ी नहीं, मरीज़ को एंबुलेंस में बिठाया नहीं गया, लेकिन करोड़ों का बिल बना दिया गया। एंबुलेंस घोटाले को छिपाने के लिए एंबुलेंस पर लगे जीपीएस सिस्टम को हटा दिया गया। अगर जीपीएस सिस्टम लगा होता तो साफ पता लगता कि एंबुलेंस कितनी दूर गई, कहां से मरीज़ को बिठाया गया और किस अस्पताल में पहुंचाया गया। लेकिन एंबुलेंस चलानी वाली कंपनी का बिल पास होता गया, जबकि कंपनी ने पेशेंट डाटा रिकॉर्ड दिया ही नहीं। मतलब कंपनी सिर्फ बिल भेजती गई, मरीज़ एंबुलेंस में बैठा या नहीं, इसकी जांच नहीं हुई और बिल पास हो गया। कंपनी से हुए करारनामे में साफ लिखा था कि कंपनी की तरफ से पेशेंट डाटा रिकॉर्ड जमा किया जाएगा। लेकिन इस बात को नज़रअंदाज़ किया गया।

ऐसा एक बार नहीं हुआ, अखिलेश सरकार के वक्त उत्तर प्रदेश में पचास से ज्यादा जिलों में गड़बड़ी हुई। एंबुलेंस चलानेवाली कंपनी टैक्सी किराए पर लेती थी, वो सरकार के पास टैक्सी का बिल जमा करती थी। लेकिन करोड़ों की लूट का एक और उदाहरण देखिए। टैक्सी के बिल की जब जांच हुई तो पता चला कि बिल में दिया गया नंबर मोटरसाइकिल का निकला। कई बार वो नंबर ट्रक का भी निकला। मतलब बिल पर किसी भी गाड़ी का कोई भी नंबर मन से भरा गया और बिल पास होता गया।  ऐसा नहीं है कि इस गड़बड़ी को रोकने के लिए अलार्म नहीं बजाया गया। डिपार्टमेंट के उस वक्त के डायरेक्टर  आलोक कुमार ने  कई बार रिकॉर्ड मांगा, अखिलेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने भी मीडिया को बताया कि उन्होंने भी जांच के लिए कई दफा चिट्ठी लिखी थी। लेकिन बिल का भुगतान नहीं रोका गया।

आखिरकार चुनाव से ठीक पहले चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की देखरेख में जांच शुरू हुई और हकीकत सामने आई।  ये घोटाला करीब 2000 करोड़ का बताया जा रहा है। अखिलेश सरकार के वक्त कागज पर 108 नंबर वाली 1480 एंबुलेंस चलाई जाती थी और 102 नंबर की 1960 एंबुलेंस चली। हर महीने 40 करोड़ से ज्यादा रुपए बांटे गए। अखिलेश सरकार ने जीवीके कंपनी से सौदा तय किया था। करार के मुताबिक कंपनी को रुपया देने से पहले तीसरे पक्ष से सभी बिल और रिकॉर्ड की जांच करवाना  तय था। लेकिन जांच रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ। मंत्री ने बार बार लिखा की बिल का भुगतान रोका जाए, फिर भी पैसा बांटा गया। अब सवाल है कि आखिर मंत्री से ऊपर वो व्यक्ति कौन था, जिसके कहने पर हर महीने 40 करोड़ से ज्यादा रुपए खज़ाने से निकलते रहे। योगी सरकार उसी व्यक्ति को पकड़ने की तैयारी कर रही है।

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